कोणार्क सूर्य मंदिर का रहस्य, क्यों 118 सालो से बंद है ?

Konark Sun Temple Fact In Hindi :- भारत के उड़ीसा में स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर ना केवल अपनी भव्य सुंदरता और वास्तुकला को लेकर विश्व भर में प्रसिद्ध है बल्कि कुछ रहस्य के कारण भी यह दुनिया भर में जाना जाता है। जी हां कोणार्क सूर्य मंदिर ऐसा स्थान है जहां कई रहस्य छिपे हुए इसलिए आज के इस पोस्ट में हम कोणार्क सूर्य मंदिर का रहस्य (Konark Sun Temple Fact In Hindi) के बारे में बात करने जा रहे हैं। दोस्तों आपको बता दें, कि आज भी कोणार्क में स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर के रहस्य की चर्चाएं विश्व भर में प्रसिद्ध है और यह चर्चाएं ही लोगों का ध्यान इस मंदिर की ओर आकर्षित करता है। इस मंदिर की कई पौराणिक मान्यताएं भी है, जिनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं।

कोणार्क सूर्य मंदिर  का रहस्य
Konark Sun Temple Fact In Hindi

Konark Sun Temple Fact In Hindi (कोणार्क सूर्य मंदिर का रहस्य )

माना जाता है कि ओडिशा में स्थित कोर्णाक सूर्य मंदिर लगभग 772 साल पुराना है। यही कारण है कि देश विदेश से लाखों की तादाद में सैलानी इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर का निर्माण भी इस ढंग से किया गया है कि सूरज उगते ही पहली किरण सीधे इस के द्वार पर पड़ती है। आईए इस मंदिर की बाकी विशेषताओं के बारे में भी जान लेते हैं –

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1250 में बना था कोणार्क सूर्य मंदिर

माना जाता है कि कोर्णाक सूर्य मंदिर का निर्माण 1250 में किया गया था। इस मंदिर को गांग वंश राजा नरसिंहदेव प्रथम ने उड़ीसा के पुरी में बनवाया था। उन्होंने यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित किया था। इस मंदिर का जिक्र करते हुए अबुल फजल ने आइन-ए-अकबरी में लिखा है कि, राजा नरसिंह देव ने 12 साल के पूरे राजस्व को मंदिर के निर्माण में लगा दिए।

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कलिंग शैली में बना है मंदिर, रथ में हैं 7 घोड़े और 12 जोड़ी पहिए

इस मंदिर की खास बात यह है कि यह कलिंग शैली द्वारा बनाया गया है। इस मंदिर की संरचना रथ के आकार की है इस रथ में 7 घोड़े हैं और 12 जोड़ी पहिए हैं। रथ में मौजूद 7 गुणों को हफ्ते के साथ दिनों का प्रतीक माना जाता है और प्रत्येक पहिए का व्यास लगभग 3 मीटर का है। इन पहियों को धूप धड़ी भी कहा जाता है क्योंकि यह समय का पता लगाने में सहायता करते हैं। यह मंदिर पूर्व मुखीय है और इसका निर्माण इस तरह से किया गया है कि सूर्योदय के समय सूरज की किरणें सीधे इस के द्वार पर पड़ती है।

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12 साल से भी ज्यादा वक्त में बना था मंदिर, नदी में कूद गया था कारीगर

इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही दो मूर्तियां देखने को मिल जाती हैं। इस मूर्ति में सिंह के नीचे हाथी है और हाथी के नीचे मानव है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर के उत्तर में चंद्रभागा नदी बहा करती थी जो कि वर्तमान में विलुप्त हो चुकी है।

कई लोगों का मानना है कि इस मंदिर के निर्माण में लगभग 1200 शिल्पकारों ने अपना हुनर दिखाया था। उन्होंने 12 साल तक इस मंदिर को पूर्ण करने का प्रयास किया लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। इस मंदिर के मुख्य शिल्पकार दिसुमुहराना के बेटे धर्मपदा 12 वर्षों बाद निर्माण कार्य पूरा किया। हैरत की बात यह है कि उन्होंने मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद चंद्रभागा नदी में कूदकर जान दे दी थी।

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मंदिर का निर्माण खास इसलिए है क्योंकि इसके निर्माण में बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट पत्थर का इस्तेमाल हुआ है। यह मंदिर पूरी तरह से सूर्य देव को समर्पित किया गया है। जैसा कि इसके नाम से ही प्रतीत होता है कोर्णाक मंदिर, जोकि दो शब्दों से मिलकर बना गया है, ’कोण’ और ’अर्क’ अर्क का अर्थ होता है सूर्य देव। इस मंदिर में सूर्य भगवान को रथ पर सवार बताया गया है। यह मंदिर जगन्नाथ पुरी से कुछ समय की दूरी पर ही स्थित है। वर्ष 1984 मैं इस मंदिर को UNESCO की world heritage site (विश्व धरोहर स्थल) पर शामिल कर लिया गया था।

मंदिर को लेकर पौराणिक मान्यता

इस मंदिर को लेकर रहवासियों की पौराणिक मान्यता भी काफी गहरी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को श्राप मिलने से कोढ़ रोग हो गया था।

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इस श्राप और अपनी पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए सांब ने मित्र बन में चंद्रभागा नदी के संगम पर कोणार्क में तपस्या करनी शुरू कर दी थी। उनकी यह तपस्या लगभग 12 वर्षों तक चली।

उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने उन्हें श्राप से और रोग से मुक्त कर दिया। इसके बाद सांब ने यह इस मंदिर का निर्माण करवा कर उसे सूर्य देव को समर्पित करने का संकल्प लिया। इसी बीच नदी में स्नान करने के दौरान उन्हें सूर्य देव की प्रतिमा प्राप्त हुई। ऐसा माना जाता है कि सूर्य देव की इस प्रतिमा को विश्वकर्मा ने बनाया था और इसी मूर्ति को सांब ने मंदिर में स्थापित किया।

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निष्कर्ष

आज के इस पोस्ट ‘सूर्य मंदिर का रहस्य’  में हमने कोणार्क मंदिर से जुड़े कुछ रोचक और रहस्यमई बातों पर चर्चा की और साथ ही साथ कोणार्क मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के बारे में भी बात की उम्मीद है आपको यहां दी गई जानकारी से काफी कुछ नया सीखने और समझने को मिला होगा इसी के साथ यदि आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो अपने परिचितों के साथ अवश्य शेयर करें और यदि इससे संबंधित और अधिक जानकारी चाहिए तो नीचे कमेंट के माध्यम से आप हमसे बेशक संपर्क कर सकते हैं।

कोणार्क सूर्य मंदिर का रहस्य, क्यों 118 सालो से बंद है ? | FAQ

Q1 . कोणार्क सूर्य मंदिर क्या चीज से बनाई गई है?

Ans – कोणार्क सूर्य मंदिर ग्रेनाइट पत्थर और लाल बलुआ पत्थर से बनाई गई है

Q2 . कोणार्क सूर्य मंदिर को विश्व धरोहर के रूप में कब शामिल किया गया?

Ans – यूनेस्को द्वारा साल 1844 में कोणार्क सूर्य मंदिर को विश्व धरोहर के रूप में घोषित किया गया।

Q3 . कोणार्क सूर्य मंदिर कहां स्थित है?

Ans – कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के उड़ीसा के पवित्र स्थान पूरी के समीप कोणार्क में स्थित है।

Q4 . महान कवि रविंद्र नाथ टैगोर ने इस मंदिर के लिए क्या कहा था?

Ans – रविंद्र नाथ टैगोर ने इस मंदिर के लिए कहा था कि यहां पत्थरों की भाषा मनुष्य की भाषा से सबसे श्रेष्ठ है।

Q5 . कोणार्क सूर्य मंदिर की बनावट कैसी है?

Ans – कोणार्क सूर्य मंदिर की बनावट एक विशाल रथ के समान है, जिसमें 24 पहिए हैं, जिसे सात घोड़े खींच रहे हैं और जिस पर सूर्य देव विराजमान है।

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